राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एन.ए.ए.सी.) – संस्थान के ‘गुणवत्ता दर्जे’ को समझने के लिए महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों अथवा अन्य मान्यता-प्राप्त संस्थानों जैसे उच्चतर शिक्षा संस्थानों (एच ई आई) मूल्यांकन तथा प्रत्यायन की व्यवस्था करता है । एन.ए.ए.सी. शैक्षणिक प्रक्रियाओं और उसके परिणामों, पाठ्यक्रम की व्यापकता, शिक्षण - ज्ञानार्जन की प्रक्रिया, संकाय सदस्यों, अनुसंधान, आधारभूत सुविधाओं, अध्ययन के संसाधनों, संगठनात्मक ढाँचा, अभिशासन, आर्थिक सदृढ़ता और विद्यार्थियों को उपलब्ध सुविधाओं से संबंधित संस्थानों के कार्य-निष्पादन के संदर्भ में गुणवत्ता मानदंडों के लिए शैक्षणिक संस्थानों का मूल्यांकन करता है ।

दृष्टि एवं लक्ष्य

दृष्टि

स्व और बाह्य गुणवत्ता मूल्यांकन, संवर्धन और संपोषण पहलों के संयोजन से गुणवत्ता को भारत में उच्चतर शिक्षा का निर्धारक तत्व बनाना।

 लक्ष्य

  • उच्चतर शैक्षिक संस्थानों या उनकी इकाइयों, अथवा विशिष्ट शैक्षणिक कार्यक्रमों या परियोजनाओं के आवधिक मूल्यांकन एवं प्रत्ययन की व्यवस्था करना।
  • उच्चतर शिक्षण संस्थानों में शिक्षण – अधिगम तथा अनुसंधानको बढ़ावा देने के लिए शैक्षणिक परिवेश को प्रोत्साहित करना।
  • उच्चतर शिक्षा में स्व-मूल्यांकन, जवाबदेही, स्वायत्तता और नव पद्दतियों को प्रोत्साहित करना।
  • गुणवत्ता से संबंधित अनुसंधान अध्ययन, परामर्श और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना तथा
  • गुणवत्ता मूल्यांकन, संवर्धन और संपोषण के लिए उच्चतर शिक्षा के अन्य हितधारकों को सहयोग प्रदान करना।

मूल्य संरचना

 देश के एच ई आई के बीच निम्नलिखित मुख्य मूल्यों को बढ़ावा देना -

  • राष्ट्रीय विकास के प्रति योगदान देना
  • छात्रों के बीच वैश्विक सक्षमताओं को बढ़ावा देना
  • छात्रों के बीच मूल्य प्रणाली बढ़ाना
  • प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ावा देना
  • उत्कृष्टता खोज करना

नेतृत्व

प्रो.वीरेन्द्र सिंह चौहान
सभापति, कार्यकारी समिति

प्रो.वीरेन्द्र सिंह चौहान वर्तमान में विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (एन.ए.ए.सी.) की कार्यकारी समिति के अध्यक्ष हैं । प्रो.चौहान भारतीय वैज्ञानिक हैं और अनुवांशिक अभियांत्रिकी तथा जैव-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काम कर रहे रोड्य के अनुसंधानकर्ता हैं ।वे मलेरिया के पुनर्संयोजित टीका के विकास में योगदान के लिए विख्यात हैं ।
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प्रो.धीरेन्द्र पाल सिंह (डी. पी. सिंह)

अध्यक्ष, सामान्य परिषद

प्रो.धीरेंद्र पाल सिंह (डी.पी.सिंह) वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष हैं । प्रो. डी. पी. सिंह को अनेक संस्थाओं में विभिन्न पदों पर शिक्षा नियोजन एवं प्रशासन, संस्थान निर्माण, अध्यापन तथा प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं विकास, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आदि के क्षेत्र में कार्य करने का 34 वर्षों का पेशेवर अनुभव है ।
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प्रो. एस. सी. शर्मा
निदेशक

प्रो. एस. सी. शर्मा, शिक्षाविद्, अनुसंधानकर्ता एवं प्रशासक हैं । उन्हें फ्रैक्चर मेकैनिक्स, सामग्री अभियांत्रिकी तथा नैनो प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता प्राप्त है। इससे पूर्व छत्तीसगढ़ के स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय, भिलाई (छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा सहायता-प्राप्त विश्वविद्यालय) के उप – कुलपति रहे। वे तुमकूरु विश्वविद्यालय (कर्नाटक राज्य द्वारा सहायता-प्राप्त विश्वविद्यालय) के उप – कुलपति भी रहे।

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संगठन

नैक परिसर

एन.ए.ए.सी. कार्यालय का विस्तृत परिसर पाँच एकड़ के क्षेत्र में परिव्याप्त है । यह राष्ट्रीय विधि विद्यालय के सामने, बेंगलूरु विश्वविद्यालय के ज्ञानभारती परिसर, नागरभावी में स्थित है । एन.ए.ए.सी. कार्यालय, वास्तुकला की राष्ट्रीय स्तर की खुली स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त डिजाइन पर बनी व्यावहारिक और शानदार ईमारत में है । एन.ए.ए.सी. परिसर में कार्बन मुक्त, पर्यावरण-अनुकूल, ऊर्जा संरक्षण और वर्षा जल संरक्षण जैसी प्राथमिकताओं को कार्यान्वित किया जा रहा है। इमारत का डिज़ाइन अपने आप में अनोखा है, जिसमें छत की खिड़कियों से सारी ईमारत में सूर्य की रोशनी फैल जाती है और खिड़कियों से हवा बहती रहती है, जिस कारण बिजली का उपयोग घट जाता है । हरा भरा परिसर, पर्यावरण सन्तुलन, पर्यावरण के संसाधनों का संरक्षण, प्रकृति की सेवा से परिसर में बने खुशनुमा माहौल का सम्मोहक असर होता है । एन.ए.ए.सी. परिसर में सारी आवश्यक सुख-सुविधाओं से युक्त 20 कमरोंवाला, पूरी तरह से सुसज्जित, अतिथि-गृह तथा कुछ कर्मचारी आवास एवं निदेशक आवास भी है ।

नैक का उद्यान: वनीकरण तथा पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की ओर कदम बढ़ाते हुए एन.ए.ए.सी. ने अपने परिसर में सुव्यवस्थित उद्यान लगाकर पोषित किया है। बेंगलूरु विश्वविद्यालय के अनुभवी श्रेणीकार डॉ. टी. एम. रामकृष्णन और डॉ. वाई. एन. सीताराम की सहायता से श्री रवि कुमार (एस.पी.ए.) ने 300 से ज्यादा देशी-विदेशी पेड़-पौधों की प्रजातियों को पहचानकर उन्हें दस्तावेज़ किया है। इस परियोजना का नेतृत्व प्रो. एच. ए. रंगनाथ (पूर्व-निदेशक, एन.ए.ए.सी.) ने 2012-13 में किया, जिसमें उन्हें एन.ए.ए.सी. के सभी पूर्व-निदेशकों से उचित सहायता एवं प्रोत्साहन मिला । मैसूर बागवानी संस्था, लालबाग द्वारा आयोजित बागवानी प्रदर्शनी में एन.ए.ए.सी. उद्यान लगातार पुरस्कार प्राप्त कर रहा है तथा अपने बेहतरीन रख रखाव के लिए प्रशंसा का प्रात्र बना है।

नैक में पेड़-पौधे: एन.ए.ए.सी. में उपलब्ध फूलों, फलों, औषधीय, साजवटी पौधों, आवासी तथा गैर-आवासी पेड़-पौधों को पहचानकर उनका दस्तावेजीकरण किया गया है । पौधों को चार वर्गों में विभाजित किया गया है और हरेक को उसके वनस्पति-वैज्ञानिक नाम, परिवार तथा तीन भाषाओं (कन्नड़, हिन्दी एवं अंग्रेजी) में सर्वसामान्य नाम से चिन्हित किया गया है, साथ ही उनके सम्बन्ध में रोचक तथ्य एवं जानकारी भी दी गई है। यह एन.ए.ए.सी. द्वारा किया गया अनूठा प्रयास है, जो बहुत से पेड़-पौधों के जानकारों और आगंतुक शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित कर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है ।


निदेशक,एन.ए.ए.सी. द्वारा प्राक्कथन
प्रशस्ति पत्र

Flora of NAAC

नैक की वनस्पति (पीडीएफ संस्करण) नीचे उपलब्ध है:

नैक कार्यालय, नई दिल्ली

दिल्ली में स्थित एन.ए.ए.सी. कार्यालय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन की प्रक्रिया में समन्वय स्थापित कर उत्तरी क्षेत्र के विश्वविद्यालयों एवं विद्यालयों में जागृति कार्यों को संपन्न करेगा । इसके अतिरिक्त हिन्दी में विज्ञापन सम्बन्धी सामग्री निर्माण करना; मूल्यांकनकर्ताओं की जानकारी का संवर्धन करना; सरकार, वैधानिक एवं नियामक मण्डलों से सम्पर्क बनाना और रोजमर्रा के कार्यों में केन्द्रीय विभाग के रूप में कार्य करना अन्य लक्ष्य हैं ।   








नैक कार्यालय, नई दिल्ली से संपर्क करें

Inauguration of  the NAAC  Office, New Delhi

नैक कार्यालय, नई दिल्ली का उद्घाटन प्रोफेसर डी। पी। सिंह, अध्यक्ष, यूजीसी द्वारा 14 मई, 2018 को दिल्ली के अनुव्रत भवन, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग में किया गया।